क्रिकेट के भगवान की जिंदगी दिखाती है सचिन: ए बिलियन ड्रीम्स

सचिन: अ बिलियन ड्रीम्स एक डॉक्यूमेंट्री ड्रामा है. यह क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की कहानी है. एक मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का कैसे शोहरत की बुलंदियों पर पहुंच जाता है, यह फिल्म इसी कहानी को दिखाती है. यह फिल्म सचिन के मेहनत को दिखाती है और बताती है कि सपलता के लिए कोई शॉर्ट-कट नहीं होता.

बेटी सारा से शुरू होती है फिल्म
फिल्म की शुरुआत एक वीडियो से होती है, जिसमें  सचिन की गोद में उनकी नन्हीं बिटिया सारा हैं. यह रि‍यल वीडियो है और उस समय का है, जब सारा पैदा हुई थीं. सचिन ने जब उन्हें अपनी गोद में पहली बार लिया था तब उन्होंने कहा था कि ‘मुझे बहुत डर लग रहा है इसे पकड़ने में’. फिर फिल्म की कहानी सचिन के बचपन की तरफ कहानी बढ़ती है. सचिन बचपन में काफी शरारती थे. वो कभी किसी की गाड़ी की हवा निकाल देते थे.

 

बहन के बैट ने बदल दी जिंदगी
सचिन की जिंदगी तब बदलती है, जब उनकी बड़ी बहन तोहफे में उन्हें बैट देती हैं. इसके बाद सचिन अपने बड़े भाई अजीत के साथ क्रिकेट खेलना शुरू कर देते हैं. 1983 के वर्ल्डकप ने सचिन की जिंदगी को एक नई दिशा दी. वो क्रिकेट को अपनी मंजिल मानने लगे और वर्ल्डकप जीतने का सपना देखने लगे.

अपने गुरु आचरेकर जी के साथ क्रिकेट प्रैक्टिस से लेकर अपने पहले मैच तक पहुंचने का सफर ड्रामा फॉर्म में है. फिल्म में बाद में ज्यादातर असली वीडियोज दिखाए गए हैं और अलग-अलग लोगों के जरिए कहानी आगे बढ़ती है.

मास्टर-ब्लास्टर की लाइफ के रोमांचक और इमोशनल पहलू
1) सचिन बचपन से सबके चहते थे. माता-पिता का उनपर विश्वास था, सचिन जो करना चाहते थे उन्हें वो करने दिया गया. बड़े भाई अजीत ने उनकी मंजिल को अपनी मंजिल माना और हमेशा उनका साथ दिया.

2) सचिन की जिंदगी का पहला मैच पाकिस्तान के खिलाफ था, तब पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने उन्हें बहुत हल्के में लिया था. लेकिन उनके बारे में वसीम अकरम ने कहा था कि सचिन में उन्हें महान खिलाड़ी बनने का अक्स शुरू में ही दिख गया था.

3) बड़ा खिलाड़ी बनने के बाद भी संगीत से उनका लगाव  था. वैसे और उनका नाम ही मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन की वजह से रखा गया था.

4) खेल के प्रति चाहे बारिश हो या धूप, सचिन ने कभी क्रिकेट प्रैक्टिस के साथ समझौता नहीं किया. जल्दी अगर वो आउट हो जाते तो किस तरह से अपनी ख़ामियों पर काम करते.

5) एक आदर्श पुत्र, एक आदर्श पति और अपने दो बच्चों के पिता के तौर पर वो कैसे थे ये बखूबी दर्शाया गया है.

6) क्रिकेट कप्तान बनने के बाद किस तरह से कुछ सीनियर खिलाड़ी उनकी बात नहीं मानते थे और मोहम्मद अज़हरुद्दीन के साथ उनकी अनबन भी बहुत सलीके से दिखाई गई है. एक रियल विडियो में यंग सचिन अपने फैन्स को ऑटोग्राफ दे रहे हैं और बगल में चुपचाप अज़हर बैठे हैं. साथ रवि शास्त्री की कमेंट्री जहां वो इशारों में कह रहे हैं कि साफ दिख रहा है किस तरह से लाइमलाइट बदल रही है.

7) एक सफल खिलाड़ी का डाउनफॉल दि‍खाया है जब अखबार की हेड लाइन तेंदुलकर के बजाय “एंडुलकर” बनने लगी. उस दौरान परिवार के साथ उन्होनें कैसे वक्त बिताया- एक वीडियो में उसी दौरान अपने बेटे और बेटी के साथ ख़ूब हंसी मजाक करते दिखते हैं सचिन.

8) 2007 में शर्मसार हार के बाद 2011 में वर्ल्ड कप जीतने की मेहनत को बहुत अच्छे से दिखाया है.

9) कुछ कमाल के विडियोज जहां सचिन 35 सेंचेरी बनाने के बाद अपने टीम मेट्स के साथ केक काट रहे हैं , या विदेशी लोकेशन में आम आदमी की तरह बीवी बच्चों के साथ घूम रहे हैं, जो भारत में उनके लिये मुनासिब नहीं है.

10 ) पिता को खोने का दर्द और किस तरह उन्होंने अपने पिता को ही अपना भगवान माना. पहली बार जब होटल के कमरे में सचिन की पत्नी ने उन्हें अपने पिता की मौत की खबर सुनाई… वो पल देखकर दर्शक अपनी आंखों में आंसू नहीं रोक पाते.

लेकिन इन मुद्दों को ढूंढेंगे दर्शक 

1) सचिन और अंजली की प्रेम कहानी, बतौर पुत्र, पिता और पति तो वो दिखते हैं , लेकिन प्रेम कहानी शुरू कैसे हुई थी वो अंश फिल्म में नहीं है.

2) विनोद कांबली जो उनके बचपन के दोस्त थे उनके साथ पहली बड़ी पार्टनरशिप का जि‍क्र जरूर है लेकिन बाद में उनके और कांबली के बीच की दरार फिल्म में नहीं है.

डॉक्यूमेंट्री है, धोनी पर बनी फिल्म से तुलना ना करें
डॉक्यूमेंट्री की कहानी बताना मुश्किल होता है ,लेकिन निर्देशक जेम्स अर्कस्किन ,लेखक संदीप स्रिवास्तव और सिवाकुमार अनंत, की तारीफ करनी होगी जिस तरह से उन्होंने इस फिल्म में सचिन के बचपन को ड्रामा फ़ॉर्म में रखा है और बाद में असल विडियोज के जरिये कहानी को आगे बढ़ाया है और बीच बीच में सिर्फ सचिन को ही सूत्रधार की तरह दिखाया.

साथ ही सचिन की पत्नी और सचिन के सीनियर्स सुनील गावस्कर, कपिल देव और रवि शास्त्री के इंटरव्यूज के ज़रिये भी कहानी को दिलचस्प बनाया है , सचिन के फ़ैन्स के साथ महानायक अमिताभ बच्चन के इंटरव्यू भी हैं जहां वो बता रहे सचिन जब फील्ड पर उतरते थे तो उन सबकी उम्मीदें बढ़ जाती थीं.

हां, धोनी की बायोपिक से इस फिल्म की तुलना नहीं करनी चाहिये क्योंकि वो पूरी तरह फि‍क्शन थी.

No Stars क्योंकि सचिन के आगे तारे फीके हैं… 

अब सवाल इस फिल्म को कितने स्टार्स दिये जाएं तो जवाब है सचिन तेंदुलकर की कहानी पर्दे पर देखने के लिये सिर्फ सचिन का नाम ही काफी है. हर उस शख्स को ये फिल्म देखनी ही चाहिये जो जिंदगी में कुछ हासिल करना चाहता है.

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