बीता फरवरी महीने में उत्पादक गिरावट के चलते आर्थिक रूप से ठीक नहीं रहा। इस महीने उत्पादक इंडस्ट्रियल में गिरावट दर्ज की गई है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार फरवरी में इंडस्ट्रियल उत्पादन (आईआईपी) ग्रोथ 0.1 फीसदी रही है। लेकिन पिछले साल यह आंकड़ा समान अवधि पर 6.9 फीसदी रहा था। सूत्रों के अनुसार फूड आर्टिकल्स और फ्यूल की महंगाई के कारण मार्च में खुदरा महंगाई (सीपीआई) बढ़कर 2.86 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है। जबकि एक महीने पहले फरवरी में यह आंकड़ा 2.57 फीसदी पर था।

पिछले 20 महीनों में आईआईपी ग्रोथ सबसे कम पाई गई है। इससे पहले जून 2017 में इससे कम ग्रोथ रही थी। दुनिया के सारे देशों में आईआईपी का देश की अर्थव्यवस्था में खास महत्व होता है। इससे देश की इकोनॉमी में इंडस्ट्रियल ग्रोथ के बारे में बता चलता है। आईआईपी के अनुमान के लिए 15 एजेंसियों से आंकड़े जुटाए जाते हैं। इनमें डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस, सेंट्रल स्टेटिस्टिकल आर्गेनाइजेशन और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी शामिल हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में अप्रैल से फरवरी के दौरान इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) ग्रोथ 4 फीसदी रही है। लेकिन एक साल पहले 2017-18 में यह आंकड़ा 4.3 फीसदी रहा था।

सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (सीएसओ)के आंकड़ों मुताबिक फरवरी 2019 में फूड बास्केट की महंगाई में 0.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जबकि जनवरी में 0.66 फीसदी की गिरावट आई थी। मार्च 2019 में फ्यूल और लाइट सेगमेंट में 2.42 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है। जबकि फरवरी में यह आंकड़ा 1.24 फीसदी रहा था।

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