राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के आरोपों पर जिस आत्मविश्वास के साथ अपनी सरकार का पक्ष रखा। कांग्रेस तथा विपक्ष के आरोपों पर मोदी ने सरकार के 55 माहों के कार्यों का उल्लेख करते हुए अपना पक्ष रखा। इस दौरान उनका जो आत्मविश्वास संसद में देखने को मिला। उससे स्पष्ट है 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा बड़े आक्रमक ढंग से विपक्ष को घेरने की तैयारी कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी महा गठबंधन को महा मिलावट बताते हुए विपक्ष पर तगड़ा प्रहार किया। वहीं मोदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, उनकी मां सोनिया गांधी, बहन प्रियंका और जीजा रॉबर्ट वाड्रा के भ्रष्टाचार के आरोप में जिस तरह के हमले नेहरू गांधी परिवार पर किए। उससे स्पष्ट है, कि लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों पक्षों की तल्खी अभी और बढ़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्ष के हमलों से बेपरवाह होकर, जिस तरह से उनका मुकाबला कर रहे हैं। उससे भारतीय जनता पार्टी का आत्मविश्वास जरूर बढ़ेगा। संसद में पूरे आत्मविश्वास के साथ उन्होंने राष्ट्रपति के भाषण पर धन्यवाद करते हुए विपक्ष की आलोचना का कोई मौका नहीं छोड़ा। विपक्ष के आरोपों का उन्होंने स्पष्ट जवाब तो नहीं दिया। किंतु स्वतंत्रता के बाद से पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा अपनी जिम्मेदारी का, जो निर्वहन 55 सालों में नहीं किया। उन्होंने 55 माह में करने की बात कही। उन्होंने रोजगार भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर भी सदन में अपने 55 माह के कार्यों का जिस ढंग से उल्लेख किया, भले वह काल्पनिक हो। जो लोग मोदी का भाषण सुन रहे थे। वह सभी लोग मोदी की वाकपटुता से प्रभावित थे। भावात्मक रूप से भी प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पक्ष में माहौल बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ा। उल्टे विपक्ष ने जिन आरोपों में मोदी को घेरने का प्रयास किया। उन्हीं आरोपों को उन्होंने अपने अनुकूल बना लिया। 9000 करोड़ रूपया लेकर भागे माल्या की 13000 हजार करोड़ की संपत्ति जप्त करने की बात कहकर उन्होंने बेहतर ढंग से बचाव भी किया। नेहरू गांधी फैमिली को रक्षा सौदों के मामले में भ्रष्ट बताते हुए बिना दलाली के कोई भी सौदा नहीं होने की बात कहकर गांधी फैमिली पर सीधा हमला किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में राहुल गांधी के उस आरोप का भी जवाब दे दिया, कि वह डरने वाले नहीं हैं। बल्कि वह है डराने वाले राजनेता हैं। उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से रॉबर्ट वाड्रा के ऊपर इशारा करते हुए यह जताने की भी कोशिश की, भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए वह किसी से डरने वाले नहीं हैं। राफेल मामले में प्रधानमंत्री मोदी ने अभी तक कांग्रेस के आरोपों का जबाव नहीं दिया है। राफेल सौदे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कांग्रेस को घेरने के लिए रक्षा सौदों में दलाली तथा राफेल के सौदे को कई वर्षों तक लंबित रखने पर युपीए सरकार को घेरने का काम करके अपने वाक चातुर्य का परिचय दिया है। विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकतंत्र खतरे में है। संवैधानिक संस्थानों को खत्म किया जा रहा है। इन आरोपों के स्पष्ट जबाव देने के स्थान पर उन्होंने कांग्रेस को ही घेरने का काम करके राजनैतिक चातुर्य का प्रदर्शन किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान संसद में अपने लंबे भाषण के दौरान विपक्षी महागठबंधन, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, रॉबर्ट वाड्रा को जिस तरह निशाने पर लिया । जिस तरीके से उन्होंने संसद में अपना भाषण दिया है। उससे तो यही लगता है की लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान संपूर्ण विपक्ष मिलकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुकाबला आसानी से नहीं कर पाएगा। विपक्षी महागठबंधन में फूट का लाभ किस तरह उन्हें लेना है, वह अच्छी तरीके से समझ गए हैं। भाजपा की चुनावी रणनीति की सबसे बड़ी खासियत भी यही, है कि वह अपने विपक्षियों को आपस में एक नहीं हो। इसके लिए शीर्ष नेतृत्व को अपने निशाने पर लेते हैं, उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और उनकी कमजोरियां दोनों पर ही जबर्दस्त प्रहार करते हैं। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है, कि वह बिना किसी दबाव में आए अपने ही ढंग से राजनीति करते हैं । यही उनकी सफलता का राज भी है। विपक्ष के किसी आरोपों का उन्होंने कोई भी तथ्यात्मक जवाब ना देते हुए भी, विपक्ष को पूरी तरह घेर लिया। यही उनकी सफलता का राज भी है।

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