वैज्ञानिकों की मानें, तो फैट्स और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर फूड आइटम्स हमारे ब्रेन के रिवॉर्ड सिस्टम को प्रभावित करते हैं और इसीलिए हम जंक फूड से दूर नहीं रह पाते। फैटी और कार्बोहाइड्रेट-रिच फूड दिमाग को सिग्नल भेजने वाले अलग-अलग रास्तों के ज़रिए रिवॉर्ड सिस्टम को ऐक्टिवेट करते हैं। जब फैट और कार्बोहाइड्रेट खाने में एक साथ मिलते हैं, तो इसका प्रभाव और बढ़ जाता है। हमारे पर्यावरण में ऐसा कोई भी फूड आइटम नहीं है, जिसमें फैट और कार्बोहाइड्रेट का ज़्यादा अनुपात हो। या तो वे सिर्फ फैट में रिच होते हैं या फिर वे सिर्फ कार्बोहाइड्रेट युक्त होते हैं (जैसे कि आलू और अनाज)। बस ब्रेस्ट मिल्क एक ऐसी चीज है, जिसमें फैट और कार्बोहाइड्रेट दोनो होते हैं।
वैज्ञानिक पता लगाना चाहते थे कि क्या लोग अलग-अलग कैलोरी लेवल वाले फूड आइटम्स को तरजीह देते हैं या नहीं और इसके लिए उन्होंने 40 लोगों पर सर्वे किया। इन लोगों को जो खाना ऑफर किया, उसमें फैटयुक्त और कार्बोहाइड्रेट रिच खाना भी था। साथ ही वे आइटम भी थे, जिनमें फैट और कार्बोहाइड्रेट दोनों थे। इसके बाद कंप्यूटर में पार्टिसपन्ट्स के बिहेवियर को रिकॉर्ड किया गया कि वे किस फूड आइटम को खरीदना चाहते हैं। इसमें ज़्यादातर लोगों ने फैट और कार्बोहाइड्रेट रिच फूड के लिए पेमेंट किया, जिससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि फैट और कार्बोहाइड्रेट रिच फूड में लोगों की ज़्यादा दिलचस्पी है। पार्टिसपन्ट्स के इस बिहेवियर और ब्रेन ऐक्टिविटी को एक मैग्नेटिक रेज़नन्स टोमोग्राफी पर रेकॉर्ड किया गया। इसमें दिखा कि फैट और कार्बोहाइड्रेट रिच फूड आइटम्स अन्य फूड आइटम्स के मुकाबले ब्रेन के रिवॉर्ड सिस्टम को ज़्यादा ऐक्टिवेट करते हैं। जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टिट्यूट फॉर मेटाबॉलिज़्म रीसर्च के मार्क टीटगेमेयेर ने कहा, ‘हम हमेशा ‘न’ कहने के मूड में नहीं होते और यही वजह से पेट भरा होने पर भी हम खाते रहते हैं।’

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