राफेल डील पर मीडिया में आई एक खबर पर राजनीति गर्म हो गई है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि राफेल करार में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने जिस तरह से सक्रिय भूमिका निभाई, उसका रक्षा मंत्रालय ने विरोध किया था। पूर्व रक्षा सचिव ने कहा कि राफेल पर रक्षा मंत्रालय के विरोध में राफेल की कीमत का कोई मसला नहीं था। उन्होंने कहा कि इस मसले को अनावश्यक रूप से सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए। मीडिया रिपोर्ट देश की राजनीति में सियासी गर्मी पैदा कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर संवाददाता सम्मेलन कर हमला बोला।
इस बीच तत्कालीन रक्षा सचिव और अब रिटायर्ड आईएएस अधिकारी जी मोहन कुमार ने कहा इस विरोध में राफेल की कीमतों से कोई लेना-देना नहीं था। गौरतलब है कि एक अंग्रेजी अखबार ने खुलासा किया है कि फ्रांस सरकार के साथ राफेल डील को लेकर रक्षा मंत्रालय की ओर से की जा रही डील के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के दखल का फायदा फ्रांस को मिला था। पूर्व रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने कहा जो कुछ भी छपा है उसमें कीमत का कोई मसला नहीं है, बल्कि यह सिर्फ सॉवरेन गारंटी के लिए था। पीएमओ से कीमत को लेकर किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं था। कीमत तय करने का काम हमारे द्वारा उपयुक्त तरीके से किया गया और इस बारे में किसी तरह का दुष्प्रचार नहीं किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि एक अंग्रेजी के अखबार में खबर छपी है कि राफेल सौदों को लेकर पीएमओ के दबाव का तब रक्षा मंत्रालय ने विरोध किया था। खबर के अनुसार जब इस विवादास्पद सौदे पर बातचीत चरम पर थी, तब तत्कालीन रक्षा मंत्री ने इस पर सख्त आपत्ति जताई थी। रक्षा मंत्रालय ने इस पर सख्त आपत्ति जताई है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) फ्रांस से ‘समानांतर तौर पर बातचीत’ कर रहा है। अखबार में रक्षा मंत्रालय के 24 नवंबर, 2015 की एक टिप्पणी का हवाला दिया गया है, जिसमें तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के सामने यह बात लाई गई कि पीएमओ द्वारा समानांतर तौर पर होने वाले बातचीत से रक्षा मंत्रालय और सौदे के लिए बातचीत करने वाली भारतीय टीम का पक्ष कमजोर हुआ है।
इसमें कहा गया ऐसा लगता है कि पीएमओ को रक्षा मंत्रालय की टीम द्वारा की जाने वाली बातचीत को लेकर भरोसा नहीं था। इसलिए पीएमओ ने इस पर नए सिरे से बातचीत शुरू की। सरकार ने पिछले साल अक्टूबर माह में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राफेल सौदे के लिए बातचीत डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ के नेतृत्व वाली एक टीम ने की थी।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील पर नए खुलासे के बाद फिर से मोदी सरकार पर हमला किया और अंग्रेजी अखबार का हवाला देते हुए कहा कि रक्षा मंत्रालय ने इस सौदे का विरोध किया था। राहुल ने कहा कि पीएम ने सीधे तौर पर डील में हस्तक्षेप किया था। मोदी ने भारतीय वायुसेना के 30 हजार करोड़ का नुकसान कराया। पीएम ने चोरी कर पैसे अनिल अंबानी को दिए। उन्होंने एचएएल की जगह अनिल अंबानी की कंपनी को डील दिलवाई।

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