लंदन । एक बग का पता चला है जो 2013 से ही ऐंड्रॉयड डिवाइसेज को इंफेक्ट कर रहा था और करीब पांच साल तक हैकर को डिवाइस में जासूसी करने का पाथ दे रहा था। वायर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बग का पता मोबाइल सिक्यॉरिटी रिसर्चर सर्जी टोशिन ने लगाया।

रिसर्चर का कहना है कि यह बग हैकर्स की किसी यूजर का अकाउंट हैक करने और डेटा चुराने में मदद कर सकता था। यह बग गूगल के ओपन सोर्स प्रोजेक्ट क्रोमियम में तैयार हुआ था जो पहले क्रोम और फिर बाकी ब्राउजर्स से जुड़ा।

इस तरह ऐंड्रॉयड मोबाइल पर क्रोम ब्राउजर इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के साथ-साथ क्रोमियम पर बने बाकी ब्राउजर्स यूज करने वालों को भी इंफेक्ट कर रहा था। हैकर्स क्रोमियम के फीचर वेबवीव्व का इस्तेमाल यूजर्स का डेटा चुराने और डिवाइस का ऐक्सेस पाने के लिए कर सकते थे।

इस बग का पता शुरुआती पांच साल तक नहीं चल पाया। इतना ही नहीं, पता चलने के बाद भी इसका फिक्स केवल नए स्मार्टफोन्स में ही दिया जा रहा है। ऐंड्रॉयड 7 या इससे ऊपर वाले यूजर्स को क्रोम अपडेट्स में इसका फिक्स दिया जाएगा। पुराने ऐंड्रॉयड वर्जन वाले यूजर्स को गूगल प्लेस्टोर से एक स्पेशन अपडेट डाउनलोड करना होगा। इससे बचने के लिए जरूरी है कि यूजर्स अपना क्रोम ब्राउजर प्लेस्टोर से अपडेट कर लें और केवल ट्रस्टेड ब्राउजर्स ही इंस्टॉल करें।

फोन के सॉफ्टवेयर को अपडेट करना भी एक जरूरी और आसान स्टेप हो सकता है। मालूम हो कि एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के ओपन नेचर के चलते कई बग्स सामने आते रहते हैं, लेकिन अगर बग सिक्यॉरिटी से जुड़ा हो तो बड़ी प्रॉब्लम्स सामने आ सकती हैं।

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