हफ्ते में सिर्फ चार दिन काम, बाकी आराम। जी हां, खबर पढकर चौकिए नहीं, यह सच्चाई है न्यूजीलैंड की कंपनी पर्पेचुअल गार्डियन की। इस कंपनी ने 5 मार्च 2018 को एक अनोखा प्रयोग किया। उसने अपने 240 कर्मचारियों को एक हफ्ते में सिर्फ चार दिन काम करने के लिए कहा। इसके बाद कंपनी ने 8 हफ्तों चले इस प्रयोग का सकारात्मक असर कर्मचारियों की उत्‍पादकता, प्रेरणा और उनके आउटपुट पर देखा। इस दौरान कर्मचारियों की सैलरी, छुट्टियां और दूसरे लाभ वैसे ही रहे लेकिन अब वे हफ्ते में पांच दिन या 37.5 घंटों की जगह चार दिन या 30 घंटे काम कर रहे थे। लेकिन नतीजे चौंकाने वाले आए। स्‍टाफ के तनाव में 16 प्रतिशत की कमी आई, वर्क-लाइफ बैलेंस में 44 प्रतिशत का सुधार हुआ। इसके बाद पर्पेचुअल गार्डियन ने हफ्ते में चार दिन काम करने के इस प्रोग्राम को 1 नवंबर 2018 को लंबे समय के लिए अपना लिया। वैसे कर्मचारियों को छूट थी कि वह चाहें तो बदली योजना की जगह हफ्ते में पांच दिन काम करने की पुरानी व्‍यवस्‍था के हिसाब से काम करें। इसके अलावा स्‍टाफ की प्रतिबद्धता, नए विचारों, सशक्तिकरण और नेतृत्व भी में सुधार देखा गया। सबसे हैरानी की बात थी कि कंपनी की उत्‍पादकता में कोई गिरावट नहीं दर्ज की गई। पर्पेचुअल गार्डियन में ब्रांच मैनेजर के रूप में काम करने वाली टैमी बार्कर ने कहा, ‘जब मैंने पहली बार एक हफ्ते में चार दिन काम करने वाली बात सुनी तो पहले मुझे कुछ शक हुआ। मुझे इसमें रुचि तो थी पर जानना चाहती थी कि इस पूरी योजना में पेच कहां है। लेकिन बाद में जब हमारे समाने प्रस्‍ताव रखा गया तो मुझे अहसास हुआ कि इसमें कोई गड़बड़ नहीं है। मुझे तो ऐसा लगा कि जैसे त्‍योहारों का मौसम आ गया हो।’ टैमी बताती हैं कि इसके बाद काम को लेकर उनका नजरिया एकदम बदल गया। अब उन्‍होंने एक बार में एक ही काम पर फोकस किया इसके बाद उसे खत्‍म करके ही वह अगले काम की और बढीं। इससे पहले वह एक बार में कई काम करती थीं। टैमी का कहना है, ‘हमें एक ऑफ चुनने को कहा गया। मैंने बुधवार चुना। इसका मतलब है कि हफ्ते के शुरू में मेरे पास काम पर फोकस करने के लिए सिर्फ दो दिन होंगे फिर एक दिन ऑफ। इसके बाद जब काम पर वापसी आई तो फिर दो दिन काम और उसके बाद फिर दो दिन का ऑफ।’ इस प्रयोग के आखिर में नतीजा साफ हो गया।

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